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शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

वीडियो रिपोर्ट: कैसे तैयार होता है माता का ब्रह्म?


चंडिका माता यात्रा: साल 1999 की तस्वीर

जिन भक्तगणों ने माता चंडिका की यात्रा को पहले भी देखा होगा ब्रह्म पर उनकी आस्था उतनी ही प्रबल होगी। ब्रह्म का भव्य स्वरूप उनकी आंखों में आज भी बसा होगा। पर क्या आप जानते हैं कि माता के ब्रह्म को तैयार करने की भी एक प्रक्रिया है। जिसमें कि पारंपरिक और वैज्ञानिक प्रक्रियाएं शामिल हैं। आपको बता दें कि 6 फरवरी को ब्रह्म तैयार करने के लिए नंदप्रयाग के पास के गांव सेम से कुछ बांसों को मंदिर में लाया गया है। इन बांसों का चयन करने के भी कुछ पैमाने हैं जैसे कि-

- बांस की गोलाई और लंबाई निश्चित होती है 

- बांस पर 11 गांठें होनी अनिवार्य होती है

- लंबाई करीब 13-14 फीट होती है

- और गोलाई इतनी कि दोनों हथेलियों के घेरे में आ जाए

- बांस को 2 महीने पहले इसलिए काटा गया है ताकि सूख कर इसका लचीलापन खत्म हो जाए

- जड़ी-बूटियों एवं अन्य सामग्रियों को लेकर मंत्रोच्चार के बीच बांस में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है

- तभी ये ब्रह्म कहलाता है। 

मान्यता है कि ब्रह्म शिव स्वरूप होता है जो कि यात्रा की रक्षा करते हैं। यात्रा पूरी होने पर ब्रह्म को मंत्रोच्चार के बीच विधिवत भावपूर्ण विसर्जित किया जाता है।

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यहां है माता का मंदिर

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